पूजा को 'भगवान' संग क्यों रचाना पड़ा ब्याह?
राजस्थान के जयपुर की पूजा सिंह शेखावत सालिगराम (ठाकुर जी) के श्रीविग्रह संग ब्याह रचा कर चर्चा में हैं.
पॉलिटिकल साइंस में MA कर चुकीं पूजा सिंह की तुलना अब 16वीं सदी की मीराबाई से की जाने लगी है.
इस अचंभित कर देने वाले विवाह में गणेश पूजन से लेकर चाकभात, मेहंदी, संगीत समेत फेरों की रस्में भी हुईं.
दूल्हे के रूप में विष्णु जी को मंदिर से पूजा के घर लाया गया और मंत्रोच्चार के साथ 7 फेरे भी करवाए गए.
दुल्हन पूजा ने ठाकुर जी संग ब्याह के दौरान अपनी मांग में सिंदूर की जगह चंदन भरा.
बेटी पूजा के इस फैसले से नाराज पिता ब्याह में नहीं आए, फिर मां ने ही कन्यादान किया.
दरअसल, पति-पत्नी के बीच होने वाले झगड़े और शादीशुदा जोड़ों की तनावभरी जिंदगी के चलते पूजा शादी नहीं करना चाहती थीं.
उधर, रिश्तेदार और पड़ोसी शादी न करने को लेकर पूजा पर ताने कसने लगे थे. इससे तंग आकर पूजा को यह उपाय सूझा.
पूजा ने सोचा कि ठाकुरजी का विवाह तुलसीजी से हो सकता है, तो क्यों न वह भी ऐसा ही कर लें? पंडितों ने भी धार्मिक रूप से इस विवाह को मान्य बताया है.